मल्हार

रामचरित मानस से मिलती है प्राण ऊर्जा…रामभक्ति में लीन गयाराम की कहानी, सरकारी नौकरी छोड़ सौप दिया जीवन

हरिशंकर पांडेय

मल्हार – रामचरित मानस पढ़ने व राम को जानने के बाद जीवन में ऐसी विरक्ति आई कि 21 वर्ष की उम्र में सरकारी नौकरी छोड़ अपना पूरा जीवन भगवान राम को सौप दिया। ये कहानी है मल्हार के 83 वर्षीय गयाराम वर्मा की जो अब इस उम्र में भी परिवार चलाने रिक्शा से सब्जी बेचते नगर की गलियों में नजर आते। गयाराम की जीवनी बहुत ही दिलचस्प है। मूलतः जांजगीर चाम्पा जिले के ग्राम कनसदा निवासी गयाराम पिछले 14 वर्ष से मल्हार में रहकर परिवार चलाने सब्जी बेचते है साथ ही वे नित्य प्रति रामचरित मानस का पाठ करते है जो उनके लिए ऊर्जा का काम करता है। इसीलिए तो 83 की उम्र में भी बिना चश्मे के ही सभी काम करते है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही अध्यात्म में रुचि थी इसलिए पढ़ाई के साथ ही रामचरित मानस, गीता, शिवपुराण आदि ग्रन्थ पढ़ते थे जिससे जीवन के मूल्य समझने लगे और इस तरह वे निरंतर विभिन्न पुराणों व ग्रंथों का अध्ययन करने लगे, आठवी पास होने के बाद वन विभाग में उनकी नौकरी फारेस्ट गार्ड के रूप में लग गई पर उनका मन नही लगा और एक वर्ष बाद ही नौकरी छोड़ दी। जिसके बाद सादा जीवन उच्च विचार की भावना से अपने गाँव मे रहे। वहां भी मन नही लगा बाद में कुछ सामान्य कारण से घर से निकल गए और कई रिस्तेदारो के यहां भटकते रहे। अंततः 2010 में मल्हार आए और यही के होके रह गए। वे कहते है इस 8 दशक की जिंदगी में कई पड़ाव आए परन्तु विचलित नही हुए क्योकि मेरे पास रामचरित मानस जैसा महान ग्रन्थ था जो जीवन जीने की कला सिखाती है।

रामचरितमानस ही जीवन है….

गयाराम का कहना है कि मन को निर्मल रखना चाहिए क्योंकि रामचरित के अरण्य कांड के 34 वे दोहे में सबरी के बारे भगवान बोले मा इतना अधीर क्यो होते हो तुममें हर प्रकार की भक्ति है, बड़े बड़े महापुरुष तुम्हारे सामने नही आ सकते। सुंदर कांड में भगवान कहते है कि मुझे कपट, छल, छिद्र जिसके हृदय में है वे नही भाते। इसलिए निर्मल मन वाले ही मुझे पाते है। गयाराम कहते है कि रामचरित मानस के कारण ही घर से विरक्ति हुई और भटकता रहा पर अफसोस बिल्कुल नही है और इस उम्र में भी ऊर्जा के साथ काम करता हु। जीवन की सभी परेशानियों का निराकरण इस ग्रन्थ में है। चार वेद, छह शास्त्र, 18 पुराण, व नौ व्याकरण का सार तत्व रामचरित मानस में भरा हुआ है इसलिए यह ग्रन्थ सर्वोत्तम है।

रामलला के आने की खुशी….

जिस तरह अभी पूरे देश मे भगवान राम के लिए रामभक्त खुशी में झूम रहे है वैसे ही गयाराम भी अत्यंत ही प्रफुल्लित है क्योंकि अपने 8 दशक के जीवन काल मे पहली बार लोगो मे उत्साह व श्रद्धा देखी है, रामलला के विराजमान होने के बाद सभी रामभक्तों की वर्षो की तपस्या पूरी होगी। वे 1962 से नियमित रूप से मानस पढ़ते आ रहे है इस दौरान कोई भी परेशानियां नही आई।

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