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लोकसभा चुनाव के लिए बाप बेटे में खींची तलवार, कोरबा सीट पर दोनों ठोक रहे दावेदारी?

मरवाही विधानसभा से विधायक अमित जोगी ने अपने पिता अजीत जोगी के लिए यह सीट छोड़ी थी। शायद इस उम्मीद में कि वे लोकसभा चुनाव कोरबा से लड़ेंगे

सत्याग्रह डेस्क

राजनीति दरअसल अति महत्वाकांक्षा का दूसरा नाम है। यहां रिश्ते-नाते, छोटे-बड़े का कभी ख्याल नहीं रखा जाता । व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा सर्वोपरि हुआ करती है, ऐसे ही उदाहरणों से इतिहास अटा पड़ा है। अशोक से लेकर औरंगजेब ने भी यही किया तो मौजूदा राजनीति के चर्चित घरानों में भी विरासत को लेकर खींचतान जारी है। उदाहरण सबके सामने हैं, किस तरह अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव को हाशिए पर धकेल कर सत्ता की बागडोर अपने हाथ पर ली ।अब ऐसा ही कुछ पहली बार लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमाने उतर रही छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के साथ भी होता दिख रहा है। पार्टी गठन के बाद से राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत जोगी ने स्पष्ट कर दिया था कि विधानसभा चुनाव में उनके परिवार से दो ही लोग चुनाव लड़ेंगे। हालांकि बाद में यह संख्या तीन तक पहुंच गई, लेकिन उस वक्त अमित जोगी जो कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, को संगठन की जिम्मेदारी दी गई। तभी से यह कयास लगाया जा रहा था कि अमित जोगी कोरबा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे और वह इसके लिए लंबे वक्त से तैयारी भी कर रहे थे, लेकिन अब पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को विधानसभा में विपक्ष के खेमे में बैठना रास नहीं आ रहा है। एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर दिखने की चाह उभर आई है और उन्होंने भी कोरबा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर राजनीतिक जगत के साथ घर में भी हलचल तेज कर दी है। एक ही सीट पर पिता-पुत्र की दावेदारी से दोनों के बीच दीवार खड़ी हो चुकी है ।म्यान से तलवारें निकल चुकी है और कार्यकर्ता भी दो खेमों में बटे नजर आने लगे हैं। दिल्ली पहुंचने की चाहत में पिता और पुत्र अपना अपना रास्ता बनाने में लगे हुए हैं ,इसलिए दोनों के बीच जाहिर तौर पर जारी खींचतान घमासान में तब्दील हो सकती है

पार्टी के सभी फैसले सुप्रीमो अजीत जोगी लेते हैं लेकिन विधानसभा चुनाव में बसपा से गठबंधन के बावजूद उन्हें खास कामयाबी मिली नहीं इससे पार्टी और परिवार में उनका कद घटा है ।इसलिए परिवार में भी उनकी बात अब अकाट्य नहीं रही है । मौजूदा विवाद उस वक्त उभरा जब अजीत जोगी ने यह बयान दिया कि कोरबा लोकसभा क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि वे चुनाव लड़ें। अगर लोग चाह रहे हैं तो फिर विचार किया जा सकता है ।उन्होंने फैसला फिलहाल कोर कमिटी पर छोड़ा है, लेकिन सभी जानते हैं कोर कमेटी का भी मतलब अजीत जोगी ही है । उनके इस फैसले का सबसे बड़ा विरोध खुद उनके घर से होना है। क्योंकि मरवाही विधानसभा से विधायक अमित जोगी ने अपने पिता अजीत जोगी के लिए यह सीट छोड़ी थी। शायद इस उम्मीद में कि वे लोकसभा चुनाव कोरबा से लड़ेंगे। कोरबा लोकसभा सीट को लेकर आकर्षण की बड़ी वजह यह है कि इसी के अंतर्गत मरवाही विधानसभा क्षेत्र आता है जो अजीत और अमित जोगी का गढ़ माना जाता है। विधानसभा चुनाव में अजीत जोगी, डॉ रेणु जोगी और ऋचा जोगी चुनाव लड़ चुके हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से अमित जोगी को अब प्राथमिकता मिलनी चाहिए । लेकिन अति महत्वाकांक्षी पिता के ही मुकाबिल खड़ा होने से परिवार में ही तलवारे खींचती नजर आ रही है । विधानसभा चुनाव में पार्टी की जो दुर्गति हुई थी उससे हालांकि पार्टी के लिए कुछ खास उम्मीद लोकसभा चुनाव में नहीं बची है ।कहीं घर की लड़ाई ,सूत न कपास, जुलाहे में लट्ठाम लट्ठ ना साबित हो जाए । पहले ही पार्टी से बड़े नेता और अधिकांश कार्यकर्ता किनारा कर चुके हैं। पूरी पार्टी परिवार तक सिमट कर रह चुकी है ,लेकिन जब परिवार में ही सत्ता के लिए संघर्ष बढ़ेगा तो परिवार के साथ पार्टी का भी टूटना तय माना जा सकता है। यानी आने वाले दिन तय करेंगे छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस का भविष्य क्या होगा।

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