
रमेश राजपूत
बिलासपुर – बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सेलर में जमीन सीमांकन का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। तहसील न्यायालय के आदेश के बाद बुधवार को राजस्व विभाग की टीम अचानक गांव पहुंची और खसरा नंबर 120 की जमीन की जांच व नापजोख शुरू कर दी। कार्रवाई के दौरान दो आरआई और चार पटवारियों की टीम ने 80 से अधिक ग्रामीणों के घरों की भी नापजोख की, जिससे गांव में हड़कंप मच गया। दशकों से यहां रह रहे परिवारों में अब घर और जमीन को लेकर भविष्य की चिंता बढ़ गई है। राजस्व विभाग की टीम ने सुबह से खसरा नंबर 120 की जांच की।
इसी दौरान आसपास के कई मकानों की भी नापजोख किए जाने की बात सामने आई। ग्रामीणों का दावा है कि इनमें अनेक परिवार ऐसे हैं, जो 80 से 90 वर्षों से गांव में निवास कर रहे हैं और पीढ़ियों से अपने घरों में रह रहे हैं। नापजोख की कार्रवाई के बाद ग्रामीणों को आशंका है कि कहीं भविष्य में उनके मकानों पर भी संकट न खड़ा हो जाए। ग्रामीणों ने रायपुर के नकटी गांव जैसी स्थिति बनने की आशंका जताते हुए कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
खड़ी फसल के बीच सीमांकन पर सवाल
ग्रामीणों ने सीमांकन की प्रक्रिया और समय को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि खेतों में अभी खड़ी फसल है और ऐसे समय में सीमांकन की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें कार्रवाई की पूर्व सूचना भी नहीं दी गई। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं बेलतरा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी ने कहा कि आम व्यक्ति को अपनी जमीन का सीमांकन कराने के लिए राजस्व कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि सेलर में टीम मौके पर पहुंचकर नापजोख कर रही है। उन्होंने कार्रवाई की निष्पक्षता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
सिर्फ खसरा 120 की जांच क्यों?
ग्राम पंचायत सेलर के सरपंच धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि यदि जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए सीमांकन किया जा रहा है तो केवल खसरा नंबर 120 की जांच क्यों की जा रही है। उन्होंने करीब 60 एकड़ जमीन से जुड़े सभी खसरों की एक साथ जांच और सीमांकन कराने की मांग की, ताकि किसी तरह के पक्षपात की गुंजाइश न रहे। सरपंच ने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े होने के कारण उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
सरपंच बोले- किसी का घर नहीं उजड़ने दूंगा
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि उनके रहते सेलर में किसी ग्रामीण के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दशकों से बसे परिवारों के घरों पर संकट आया तो वे ग्रामीणों के साथ खड़े रहेंगे और जरूरत पड़ी तो आर्थिक, राजनीतिक सहित हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। वहीं विजय केशरवानी और कांग्रेस नेता राजेंद्र साहू ने भी कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वर्षों से बसे परिवारों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि कार्रवाई में राजनीतिक दबाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
13 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट घेराव
मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस नेताओं ने राजस्व कार्रवाई, ग्रामीणों की समस्याओं और कथित राजनीतिक दबाव के विरोध में 13 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान किया है। फिलहाल राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि खसरा नंबर 120 और नापजोख किए गए मकानों को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है और आगे विभाग की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ेगी।