
भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर – न्यायधानी के मल्टी सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटलों में से एक अपोलो हॉस्पिटल में डाक्टरों ने बीते दिनों एक मरीज को आपरेशन किए बिना ही दिल का वाल्व बदल दिया है। कैथेटर एआर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट तकनीक से यहां पर पहली बार वाल्व रिप्लेसमेंट किया गया है। अब तक ऐसा प्रत्यारोपण महानगरों में ही किया जाता रहा है। लेकिन हाल ही में सांस की तकलीफ की समस्या लेकर एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला अपोलो हॉस्पिटल पहुंची थी। जहां उनके एआर्टिक वाल्व में खराबी आने पर सांस फूलने जैसी कई परेशानियां बढ़ गईं थीं। जिसे अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टर भांजा और कार्डियोलाजी विभाग की टीम ने उनका सघन जांच किया। जिसमे पता चला की मरीज के वाल्व में सिकुड़न आ गई। वही ह्रदय तक खून को प्रवाहित करने वाली नली में कैल्शियम जमा हुआ है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में मरीज की ओपन हार्ट सर्जरी करनी पड़ती है। डा. राजिब लोचन भांजा ने बताया कि ओपेन हार्ट सर्जरी में चार से पांच घंटे लगते हैं। वही महिला मरीज की उम्र अधिक और अन्य बीमारी होने के कारण नई टीएवीआर विधि से वाल्व बदलने का सुझाव दिया।

जिसको लेकर अपोलो हॉस्पिटल के सीईओ डॉ मनोज नागपाल ने तत्काल ही हॉस्पिटल में उचित व्यवस्था उपल्ब्ध कराई। जिसके फलस्वरूप रविवार को महिला का सफल इलाज हो सका। इस दौरान डा. राजिब लोचन भांजा ने बताया कि टीएवीआर विधि में सीने की हड्डी नहीं काटनी पड़ती। जांघ की नस से जाकर हृदय का वाल्व बदल दिया जाता है। इसमें कम समय लगता है। प्रत्यारोपण में भी डाक्टरों ने महिला मरीज की जांघ की नस में छोटा सा चीरा लगाया। इसके बाद कैथेटर के जरिए वाल्व को हृदय तक ले जाकर प्रत्यारोपित कर दिया गया। यह पूरी प्रक्रिया महज 45 मिनट में पूरी कर ली गई। डा राजिब लोचन भांजा के अनुसार टीएवीआर विधि से प्रत्यारोपण सफल रहा। इस पूरी प्रक्रिया में डा राजिब लोचन भांजा और उनकी टीम शामिल रही।
जल्द मिल जाती है छुट्टी…
टीएवीआर तकनीक में आमतौर पर वॉल्व बदलने के दूसरे दिन से ही मरीज चलना-फिलना शुरू कर देते हैं। पांच दिन की निगरानी के बाद छुट्टी दे दी जाती है। डिस्चार्ज होने के बाद कुछ समय तक मरीज को डॉक्टर की निगरानी में ही रखा जाता है।