
डेस्क

बिलासपुर शहर के समीप अनेक मनोरम दृश्य वाले पर्यटन स्थल है जिनमें सबसे अधिक लोकप्रिय स्थल खुटाघाट जलाशय है, जहां पर शहर तथा आसपास के लोग घूमने जाते हैं ।घूमने जाने के साथ ही साथ वे अपने साथ बहुत सारी खाद्य सामग्रियां भी लेकर जाते हैं किंतु उन खाद्य सामग्रियों को ग्रहण करने के पश्चात उसके रेपर प्लास्टिक बोतल तथा प्लास्टिक सामग्रियों को इधर-उधर फेंक देते हैं। प्रशासन द्वारा डस्टबिन जैसी कोई सुविधाएं इस स्थल पर उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिस वजह से बिना हिचक के सभी पर्यटक इन अपशिष्ट पदार्थों को यत्र तत्र फेंक देते हैं जिससे यह मनोरम स्थल बहुत ही दूषित
होता जा रहा है ।

पर्यटकों की हरकतों से एक तरफ जहां खुटाघाट का प्राकृतिक सौंदर्य बेरंग को हो रहा है ,वही इस पर्यटन स्थल की छवि के साथ स्थानीय नागरिकों की छवि भी खराब हो रही है। लेकिन इसी दौर में जागरूक नागरिकों की भी कमी नहीं है रविवार को राष्ट्रीय सेवा योजना डी.पी. विप्र महाविद्यालय के स्वयं सेवक धनेश रजक ,भानु प्रसाद केवट, भुनेश्वर यादव अपने साथियों के साथ घूमने के लिए खुटाघाट जलाशय पहुंचे थे।जहां पर उन्होंने देखा कि प्लास्टिक का बोतल तथा खाद्य सामग्रियों का रैपर बिखरा हुआ है इस सब को देखने के पश्चात स्वयंसेवक अपने आप को रोक नहीं पाए तथा खूंटाघाट वर्षाजल संसाधन परिसर खुटाघाट मुख्य जल निकासी तथा आसपास की साफ सफाई करने में जुट गए।ज्ञात हो की खूंटाघाट एक पर्यटन स्थल है जहाँ दूर – दूर से पर्यटक घूमने जाते है और नास्ता खाने के बाद वही पास कचड़ा फैला देते है l लेकिन कोई एक पल के लिए नही सोचता कि कचड़ा फैलाने से परिसर और वहाँ जाने वाले व्यक्ति को तथा पर्यावरण को हानि पहुचता है।

आसपास के परिसर को साफ सफाई करने के पश्चात स्वयं सेवकों के द्वारा आने वाले पर्यटकों से आग्रह किया गया कि जो भी खाद्य सामग्री लेकर आए हैं वह खाने के पश्चात कृपया प्लास्टिक की बोतल तथा रैपर्स यहां वहां ना फेंके बल्कि उसे अपने साथ लेकर जाएं और जहां भी उन्हें डस्टबिन दिखाई दे उसमें डालने का कष्ट करें क्योंकि यह पर्यावरण ना सिर्फ हमारा है बल्कि आप सभी का भी है अगर आज आप पर्यावरण को स्वच्छ रखेंगे तो आने वाले समय में हमें इस विकट स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा l स्वयंसेवकों द्वारा किए गए इस कार्य की प्रशंसा महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ अंजू शुक्ला राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ एम एस तंबोली कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर रीना ताम्रकार कार्यक्रम अधिकारी प्रोफ़ेसर यूपेश कुमार तथा सभी स्वयंसेवकों द्वारा किया गया l
