छत्तीसगढ़बिलासपुर

महाष्टमी और महानवमी पर किया गया कन्याओं का पूजन, देवी स्वरूपा कन्याओं को भोजन कराकर लिया आशीर्वाद

कन्याओं को यजमानों ने अपने हाथों से भोजन कराकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

शनिवार को महाष्टमी और महानवमी के अवसर पर जगह जगह कन्या भोज का आयोजन किया गया। चैत्र नवरात्र में 9 दिनों तक भगवती के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना भक्तों ने की। मान्यता है कि महाष्टमी और महानवमी पर कन्याओं का देवियों की तरह आदर, सत्कार , पूजन और भोजन कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती है। नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में पूजन करने के बाद ही नवरात्र का व्रत संपन्न होता है। व्रत धारी , कन्या पूजन के पश्चात ही प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलते हैं। आयु अनुसार कन्याओं को अलग अलग नाम से पुकारा जाता है। 2 वर्ष तक की कन्या कुमारी कन्या कही जाती है , जिनकी पूजा से दुख और दरिद्रता दूर होती है। 4 वर्ष की कन्या को कल्याणी माना जाता है, इनकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है , वहीं 5 वर्ष तक की कन्याओं को रोहिणी कहा जाता है, इनके पूजन से व्यक्ति रोगों से मुक्त होता है। 6 वर्ष की कन्या को कालिका कहा जाता है, कालिका की पूजा-अर्चना से विद्या ,

विजय ,राज्यों की प्राप्ति होती है।सात वर्ष की कन्या चंडिका कहलाती है, जिनके पूजन से ऐश्वर्य, सुख की प्राप्ति होती है।
आठ वर्ष की कन्या शाम्भवी कहलाती है, जिन्हें पूजने से वाद विवाद में विजय की प्राप्ति होती है। 9 वर्ष की कन्या दुर्गा कहलाती है, जिन्हें पूजने से शत्रुओं का नाश होता है । 10 वर्ष की कन्या शुभद्रा कही जाती है , जिनकी आराधना से सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं। इन्ही भावनाओं के साथ शनिवार को सरकंडा स्थित मां पीतांबरा पीठ बगलामुखी देवी मंदिर में भी कन्या पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन किया गया। यहां कन्या स्वरूपा छोटी-छोटी बच्चियों के पैर धुलाये गए, फिर उनके माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम का टीका लगाया गया। देवी स्वरूपा कन्याओं की आरती उतार कर उन्हें दक्षिणा प्रदान की गयी। वहीं इन कन्याओं को यजमानों ने अपने हाथों से भोजन कराकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

चैत्र नवरात्र पर मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना की गई। सभी स्वरूपों की अपनी ही विशेषता और महिमा है। यहां मां बगलामुखी की पूजा अर्चना पूरे श्रद्धा भक्ति के साथ 9 दिनों तक की गई। यहां मनोकामना ज्योति कलश भी प्रज्वलित किए गए। देवी के इस स्वरूप की पूजा अर्चना से कई मनोरथ सिद्ध होते हैं
इस वर्ष महाष्टमी और महानवमी की तिथि एक ही दिन होने से शनिवार को ही कई स्थानों पर कन्या पूजन और कन्या भोज का आयोजन किया गया। कन्याओं के साथ हनुमान के रूप में बालकों को भी आदर सत्कार से भोजन कराया गया। एक प्रकार से इसी के साथ 9 दिनों का व्रत संपूर्ण हुआ।

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