
उदय सिंह
बिलासपुर – मस्तूरी विकासखंड के ग्राम पंचायत धनगवां में मनरेगा योजना के तहत कथित तौर पर हुए 2 करोड़ रुपये के डबरी निर्माण घोटाले की शिकायत पर जिला प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले में शिकायतकर्ता संतोष कुमार यादव द्वारा कलेक्टर को आवेदन प्रस्तुत कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई थी, जिसके बाद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जनपद पंचायत मस्तूरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021-22 से लेकर मई 2025-26 तक ग्राम पंचायत धनगवां में मनरेगा मद से हितग्राही मूलक डबरी निर्माण कार्यों में लगभग 2 करोड़ रुपये की आर्थिक अनियमितता की गई है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, आरईएस के उपयंत्री तथा एसडीओ की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है। आवेदन में कहा गया है कि जिन डबरियों का निर्माण कागजों में दर्शाया गया है, उनमें से कई धरातल पर मौजूद ही नहीं हैं। साथ ही फर्जी मास्टर रोल, फर्जी मूल्यांकन और फर्जी सत्यापन के माध्यम से राशि आहरित कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए डबरी निर्माण कार्यों का मूल्यांकन एवं सत्यापन आरईएस अधिकारियों के बजाय कार्यपालन अभियंता स्तर के अधिकारी से कराने की मांग की है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जनपद सीईओ, कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा को पत्र जारी कर शिकायत में उल्लेखित बिंदुओं की जांच कराने तथा अभिमत सहित विस्तृत प्रतिवेदन सात दिवस के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जांच के दौरान अधिकारियों के उपस्थित रखने की मांग
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान उन डबरियों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी जो कागजों में तो दर्ज हैं, लेकिन मौके पर नहीं मिल रही हैं। साथ ही ग्राम पंचायत धनगवां के संबंधित पटवारी हल्का को खसरा एवं रकबा अभिलेखों सहित जांच के समय उपस्थित रखने की मांग भी की गई है। अब इस मामले में प्रशासनिक जांच की दिशा और रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता उजागर हो सकती है।