
उदय सिंह
बिलासपुर – शहर से महज 15 किलोमीटर दूर सकरी थाना क्षेत्र के खजुरी नवागांव में सरकारी जमीन पर कथित अवैध मुरुम और चिल्फी पत्थर उत्खनन का बड़ा मामला सामने आया है। ग्राउंड जीरो पर सामने आई तस्वीरें यह बताने के लिए काफी हैं कि यहां मामूली खुदाई नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर जमीन का स्वरूप ही बदल दिया गया है। कई हिस्सों में 20 से 30 फीट तक गहरे गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में कई महीनों से रात के अंधेरे में मशीनों और हाइवा लगाकर मुरुम-पत्थर निकाला जा रहा है। खुदाई के बाद खनिज को वाहनों में भरकर बाहर भेजे जाने की बात भी सामने आई है। सवाल यह है कि शहर के इतने करीब सरकारी जमीन पर भारी मशीनों से लगातार उत्खनन होता रहा और जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी?
मामले में वासुदेव कंस्ट्रक्शन से जुड़े उदय वासुदेव का नाम सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस संबंध में किसी व्यक्ति की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यही वजह है कि पूरे मामले में खनिज विभाग की जांच अहम मानी जा रही है।सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस जमीन पर खुदाई के निशान मिले हैं, उसके राजस्व एवं वन भूमि से जुड़े होने की जानकारी सामने आ रही है। यदि सरकारी जमीन पर बिना अनुमति खनिज निकाला गया है तो इससे शासन को राजस्व की क्षति के साथ भूमि और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
15 किलोमीटर के दायरे में ‘खुला खेल’, विभाग अनजान कैसे?
ग्रामीणों का कहना है कि रात में मशीनों की आवाज और हाइवा की आवाजाही आम बात हो गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अब संरक्षण के आरोप भी उठने लगे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले की जानकारी कलेक्टर संजय अग्रवाल तक पहुंचने के बाद उन्होंने इसे संज्ञान में लेते हुए माइनिंग डायरेक्टर को जांच के निर्देश दिए जाने की बात कही है। अब जांच में यह सामने आना जरूरी है कि किसकी अनुमति से खुदाई हुई, कितनी मात्रा में खनिज निकाला गया, कहां परिवहन किया गया और शासन को कितने राजस्व का नुकसान हुआ। खजुरी नवागांव की जमीन पर बने विशाल गड्ढे सिर्फ अवैध उत्खनन के निशान नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल हैं।