सीपत

सीपत:-400 साल पुरानी मां मन्नादाई की महिमा, 60 से बढ़कर 827 हुए ज्योति कलश; पांच जिलों में गूंज रही आस्था की गूंज

भुवनेश्वर बंजारे

सीपत – बिलासपुर जिले से लगभग 35 किलोमीटर दूर, कोरबा जिले की सीमा को छूता हुआ वनाच्छादित ग्राम सोंठी आज आस्था, सामाजिक समरसता और पर्यावरण चेतना के त्रिवेणी संगम के रूप में उभर रहा है। यहां स्थित बगलामुखी मां मन्नादाई का भव्य मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की मिसाल भी बन गया है। जहा शारदीय नवरात्रि में श्रद्धालुओं श्रद्धा भाव से बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच मां बगलामुखी मां मन्नादाई का दर्शन कर रहे है। शारदीय नवरात्रि में बगलामुखी मां की पूजा के साथ भव्य दुर्गा प्रतिमा भी स्थापित की गई है। साथ ही मंदिर के विशेष साज सज्जा देखते ही श्रद्धालुओं का मंत्र मुक्त हो रहे है। वही विशेष पूजा आरती में ग्रामीणों की उपस्थिति में पूरा सोंठी भक्ति मय माहौल में तब्दील हो गया है। आपको बता दे कि मंदिर का संचालन समस्त ग्रामवासियों द्वारा गठित पंजीकृत संस्था मां मन्नादाई सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है। समिति को बिलासपुर के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी और वर्तमान में जांजगीर में समग्र शिक्षा के जिला मिशन समन्वयक रामेश्वर जायसवाल का मार्गदर्शन प्राप्त है। समिति के वर्तमान अध्यक्ष रामेश्वर जायसवाल ने बताया कि यह मंदिर पूर्णतः अंधविश्वास से मुक्त है। पूर्व में यहां बलि प्रथा थी, परंतु 2022 से बलि प्रथा और शराब पीकर मंदिर परिसर में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंध कर दिया गया है। इस मंदिर में छुआछूत की भावना नहीं है। समाज के सभी वर्ग के लोग एक साथ सेवा करते हैं और नवरात्रि के अंतिम दिवस एक साथ भोजन बनाकर भंडारे का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा के साथ ही लोगों में सामाजिक समरसता की भावना उत्पन्न करना है। मंदिर की देखरेख में समिति के उपाध्यक्ष भीम प्रताप सिंह, कोषाध्यक्ष भूपेंद्र तिवारी, सचिव राजकिशोर ठाकुर, सदस्य हीरालाल पटेल, श्याम सुंदर पटेल, अशोक जायसवाल, जगदीश जायसवाल, संतोष वैष्णव, प्रीतम सिंह ठाकुर, घनश्याम श्रीवास, भूषण पटेल, महेंद्र चंद्रिकापुरे, मान सिंह पोर्ते, लक्ष्मी नारायण, शिव सिंह, पुजारी पंडित प्रमोद तिवारी, बैगा कार्तिक राम मरकाम, किशन मरकाम सहित समस्त ग्रामवासी और महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रहे हैं।

शारदीय नवरात्रि में भव्य आयोजन, जन जागरुकता की अनूठी पहल मंदिर समिति ने की प्रस्तुत..

मां मन्नादाई सेवा समिति के द्वारा इस नवरात्रि में हर दिन विशेष रूप से विविध आयोजन किया गया है। जहां प्रथम दिवस हजारों महिलाओं और पुरुषों द्वारा बाजे-गाजे के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई।
वही दूसरे दिन झांकी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और जगराता का आयोजन किया गया। जिसमे भजनो को सुन सभी मंत्र मुक्त हुए। वही समिति के द्वारा अनोखो पहल करते हुए तीसरे दिन शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय खम्हरिया के सौजन्य से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, जिसमें लगभग 500 श्रद्धालुओं और ग्रामवासियों ने उपचार कराकर निशुल्क दवाइयां प्राप्त किया। जबकि षष्ठम दिवस में भारतीय डाक विभाग द्वारा बच्चों के निशुल्क जीरो बैलेंस अकाउंट खोले गए और महिलाओं एवं बालिकाओं से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी गई। इसके अलावा चतुर्थ दिवस में नवरात्रि के दौरान ही एक और निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन प्रस्तावित है। जिसमे भी बड़ी संख्या में अंचल के लोगों ने लाभ उठाया।

400 वर्ष पुरानी स्वयं प्रकट्य मूर्ति, अंचल के आस्था का बन रही केंद्र..

ग्रामीण मान्यता के अनुसार मां मन्नादाई की आदिकालीन मूर्ति लगभग 400 वर्ष पुरानी और स्वयं प्रकट्य है। बताया जाता है कि सोंठी पहाड़ से धामा धुर्वा नामक गोंड बैगा अपने कंधे पर इस मूर्ति को लाकर ग्राम में स्थापित किया था। प्रारंभ में यह मंदिर एक छोटी सी कुटिया के रूप में था। 2022 में ग्रामवासियों ने चंदा और श्रमदान से इस कुटिया को भव्य स्वरूप दिया। वर्तमान में तीन एकड़ के विशाल परिसर में भव्य मंदिर, ज्योति कक्ष और आहाता का निर्माण किया गया है।

60 से बढ़कर 827 हुए ज्योति कलश, 5 जिलों में फैली ख्याति

पूर्व में मंदिर के बारे में क्षेत्र के बाहर कम लोग जानते थे, लेकिन 2022 में नवनिर्मित मंदिर के बाद इसकी ख्याति बिलासपुर के साथ ही कोरबा, चांपा-जांजगीर, सक्ति और मुंगेली जिले तक फैल चुकी है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2022 में जहां केवल 60 ज्योति कलश जलाए गए थे, वहीं इस वर्ष शारदीय नवरात्रि में 14 घृत ज्योति और 813 तेल ज्योति सहित कुल 827 ज्योति कलशों से ज्योति कक्ष जगमगा रहा है।

पर्यावरण चेतना का केंद्र

यह मंदिर पर्यावरण संरक्षण का भी प्रमुख केंद्र है। तीन एकड़ में फैले विशाल परिसर में माता की बगिया लगाई गई है, जहां औषधीय और फूलों वाले पौधे लगाए गए हैं। समस्त ग्रामवासी समय-समय पर श्रमदान से वृक्षारोपण और बगिया की साफ-सफाई का कार्य करते हैं। जो सभी आगंतुकों को प्रेरणा देने का काम करता है।


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